ABOUT THE PROJECT

यदि किसी जातक की कुंडली में नाग-हत्या का दोष प्रतीत होता है, तो उसे नागवली कर्म करना चाहिए, नारायणवली एवं नागवली कर्म दोनों भिन्न कर्म है, संतानहीनता का दोष समाप्त करने के लिए यह दोनों कर्म साथ में करना चाहिए, नारायण वली कर्म के उपरांत नाग वली कर्म का विधान कहा गया है, यदि जातक ने पूर्व जन्म में सर्प हत्या की हो या कराई हो तो उसे इस सर्प श्राप से पीड़ित होना पड़ता है, इस से निर्वृति हेतु नागवली कर्म करना चाहिए|...